रूबरू | Part 27 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
खाओ...वह मैगी का बाऊल उसकी तरफ करता है।
यह आपके लिए है...
मैं कह रहा हूं न कि खाओ... ताबिश उसकी ओर देखता है।
क्या हुआ?...
नहीं खा पाउगी?...
नमक, मिर्च ज़्यादा है?...
ताबिश उसकी तरफ झुक कर धीमी आवाज़ में बोल कर उसके चेहरे की ओर देखता है। और उठ खड़ा होता है।
मायरा का चेहरा सफेद पड़ गया।
ताबिश बाउल उठा कर मैगी डस्टबिन में डालकर किचन से बाहर निकल जाता है।
मायरा अपनी जगह बैठी रह गई।
...
दादी पुरानी हवेली में बहुत चहल-पहल लग रही है।
कौन है?
ताबिश दादी के पास बैठ गया।
बताया तो था तुमको...
भूल गए।
सादिका खाला अपनी बेटी की शादी के लिए आई हैं।
दादी ने याद दिलाया।
लेकिन दादी जब बात हुई थी। तब बात कुछ और थी। इस वक्त बात कुछ और है। आपने मना क्यों नहीं किया।
मैं जानती हूं बेटा।
लेकिन मैं अपना वादा कैसे तोड़ देती।
छः महीने पहले जब सादिका की बेटी शफकत का रिश्ता तय हुआ था तभी मैंने उससे बोल दिया था कि शादी यहीं हवेली से कर लेना। दादी ने उसे याद दिलाया।
दुश्मन का कोई भरोसा नहीं। वह तो मौके की ताक में है।
लोगों का हवेली में आना-जाना लगा रहेगा।
हम किस-किस पर नज़र रखेंगे?
जब आपने वादा किया था। उस वक्त ऐसी कोई बात नहीं थी।
आप किसी तरह मना कर देती।
ताबिश ने नाराज़गी जताई।
कैसे मना कर देती।
वह गांव से आई हैं।
उनके पास इतना पैसा भी नहीं कि वह बेटी की शादी कहीं और से कर सके।
और अब तो शफकत के ससुराल वालों को भी पता है कि शादी यहां से हो रही हैं।
इस बात से वह लोग बहुत खुश हैं कि उनका रिश्ता हमारे रिश्तेदार के यहां हुआ है।
अब मैं कैसे मना कर देती? बेटी की शादी का मामला था। परेशान दादी भी थीं। लेकिन वह मना नहीं कर सकीं।
कब है शादी?... ताबिश परेशान तो हुआ था। उनके रहने का सुनकर। लेकिन दादी के आगे वह बोल नहीं सका।
कल से रस्में शुरू हो जाएंगी। दादी को थोड़ा सुकून मिला।
आप उनसे बोल देना। कोई इस तरफ न आए। मैं गार्ड को बोल कर सिक्योरिटी बढ़ा देता हूं। ताबिश सोचते हुए बोला।
हां, मैंने बोल दिया है।
मैं भी थोड़ी देर में उनकी तरफ जा रही हूं। सोच रही हूं मायरा को भी साथ लेती जाऊं। अगर आफिस में उसका काम न हो तो...दादी उसकी ओर देखती हैं।
आफिस का अभी कोई काम नहीं है। मैंने उससे भी बोल दिया है। आप उसे अपने साथ रखना।
ताबिश की आंखों में अचानक से मायरा का चेहरा आ गया। बेसाख्ता उसके होंठों पर मुस्कान आ गई।
लेकिन रात मैगी वाली बात याद आते ही उसका मूड खराब हो गया।
तभी वहां पर मायरा आ गई।
ताबिश को देखकर उसके आंखों के सामने मैगी वाला मंज़र घूम गया।
उसे सामने देखकर ताबिश को गुस्सा आ गया। लेकिन दादी की वजह से वह खामोश रहा।
मायरा मेरे कपड़े निकाल दो। उन दोनों का चेहरा देखकर दादी जल्दी से बोलीं।
मायरा चुपचाप अलमारी खोल कर दादी के कपड़े देखने लगी।
दादी उठकर बाथरूम चली गईं।
ताबिश बैठा अपने फोन में कुछ कर रहा था। दादी के जाते ही वह मायरा के पीछे जाकर खड़ा हो गया।
जैसे ही मायरा कपड़े निकाल कल पीछे मुड़ी। ताबिश को देखकर उछल गई।
आप?...
हां, मैं...ताबिश थोड़ा और करीब हुआ।
मायरा उसके बगल से निकलने की कोशिश करती है।
लेकिन ताबिश हाथ से उसका रास्ता रोक लेता है।
क्यों परेशान कर रहे हैं?...मायरा संभल चुकी थी।
क्यों, परेशान करने का हक सिर्फ तुमको है?... ताबिश उसकी आंखों में देखता है। यूं जैसे वह उन आंखों में डूबने की चाहत रखता हो।
कल रात वाली बात के लिए सॉरी...मायरा मुद्दे पर आ गई।उसे लगा ताबिश इसी लिए उसे परेशान कर रहा है।
कल रात वाली बात की बात कौन कर रहा है?...
अभी तो मैं आज वाली बात कर रहा हूं। ताबिश की नज़र उसी पर जमी हुई थी।
आज वाली कौन सी बात?...मायरा बाथरूम की ओर देखती है।
दादी किसी भी वक्त आ सकती थीं।
कल रात वाली बात की तरह अभी वाली बात भी अभी रहने रहने देते हैं।
एक बार फिर वह भरपूर नज़र उस पर डालता है।
और उसके पास से हटकर सीधा बाहर चला जाता है।
तभी दादी बाथरूम से बाहर आती हैं।
मायरा सुकून का सांस लेती है।
देखें दादी कौन सा पहनेंगी? वह कपड़े उनकी तरफ करती है।
यह ब्लू वाला निकाल दो। और तुम भी जाओ तैयार हो जाओ। दादी उसके हाथ से कपड़ा लेती हैं।
कहीं जाना है? मायरा दादी की ओर देखती है।
हां, पुरानी हवेली चलना है। वहां पर मेरे रिश्ते की बहन अपनी बेटी की शादी के लिए ठहरी हैं।
दादी उसे पूरी बात बताती हैं।
मेरा वहां जाना कुछ अजीब नहीं होगा?...मायरा को अच्छा नहीं लग रहा था दादी के साथ जाना।
तुम भी चल रही हो...जाओ तैयार हो जाओ। दादी ने हुक्म दिया।
ठीक है दादी...वह चुपचाप बाहर निकल गई।
तैयार होते ही वह दोनों पुरानी हवेली चली गईं।
सारा दिन उधर ही गुज़ार कर वह दोनों रात को वापस आईं।
ड्राइंग रूम में ताबिश बैठा टीवी देख रहा था।
वह दोनों भी वहीं पर बैठ गईं।
बहुत देर कर दी दादी।
ताबिश अपनी जगह से उठकर दादी के पास जाकर बैठ गया।
शादी का घर है। चार काम थे। मायरा ने उनका बहुत काम कर दिया।
सादिका तो मायरा से मिल कर बहुत खुश हुई।
शफकत तो हर चीज़ मायरा को दिखा कर इसकी राय ले रही थी।
कल सुबह फिर हम उधर चले जायेंगे। तुम भी आ जाना।
खाला को अच्छा लगेगा।
आज भी तुम्हारा पूछ रही थी। आज तो बहाना कर दिया। लेकिन रोज़ तो बहाना नहीं कर सकती।
दादी ताबिश का हाथ पकड़ कर उसकी ओर देखती हैं।
मेरा वहां क्या काम?...दादी से बात करते हुए ताबिश मायरा की ओर देखता है। जो चुपचाप बैठी उन दोनों की बातें सुन रही थी।
वह थकी हुई लग रही थी।
जाओ मायरा तुम आराम करो। थक गई होगी।
सारा दिन काम करती रही थी।
दादी को अचानक से मायरा का ख्याल आया।
नहीं दादी। मैं ठीक हूं। वहां जाकर अच्छा लगा। मायरा खुशी से बोली।
ताबिश की नज़रें एक बार फिर भी उस पर उठ गई।
कुछ तो खास है तुम में मिस मायरा...वरना मेरी नज़र यूं कभी किसी पर नहीं उठी।
मायरा को देखकर अपने दिल में उठती खुशी को ताबिश साफ महसूस कर रहा था।
वह खामोश बैठा अपनी धड़कन को महसूस करता उसे देखे जा रहा था।
और मायरा खुद पर ताबिश के नज़रों की तपिश को महसूस करते हुए दादी से बातें कर रही थी।
उसका ध्यान दादी की बातों में कम, ताबिश की नज़रों में ज़्यादा था।
उसे ताबिश के नज़रों की तपिश से उलझन होने लगी।
वह दादी से नज़र हटा कर ताबिश की ओर देखती है।
एक पल दोनों की नज़रों मिलती हैं। लेकिन फिर अगले ही पल दोनों ही अपनी नज़रें झुका लेते हैं।
सगीरा... ताबिश स्टाफ को आवाज़ देता है।
जी...एक लड़की तुरंत आ गई।
हमारे लिए चाय लेकर आएं। ताबिश सबकी ओर देखता है।
आप लोग पी लें। मैं अब सोने जा रही हूं। चाय पी लूंगी तो फिर नींद नहीं आयेगी। मायरा दादी की ओर देख कर बोली।
ताबिश की तरफ देखना उसने ज़रूरी नहीं समझा।
तुम जाओ। ताबिश उस लड़की को जाने का इशारा करता है।
इशारा मिलते ही वह तुरंत बाहर निकल जाती है।
मैं अपने कमरे में जा रही हूं। चाय आ जाए तो वहीं आ जाना।
दादी कहकर उठ खड़ी हुईं। और दरवाज़े की ओर बढ़ गईं।
मायरा भी उठकर उनके साथ जाने लगी।
मायरा एक मिनट बात सुनो...
जैसे ही वह दोनों दरवाज़े से बाहर निकलने लगे। ताबिश की आवाज़ मायरा के कदमों को रोक देते हैं।
दादी बाहर निकल गईं। और वह वापस घूम कर ताबिश की ओर सवालिया नज़रों से देखती है।
ताबिश धीमी कदमों से उसकी ओर बढ़ता है।
ताबिश के हर बढ़ते कदमों के साथ मायरा के दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी।
जारी है...
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